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7
Apr 2007
” दिले नाँदा ”
Posted in Uncategorized by aakash at 11:05 am |
” दिले नाँदा “
ऍ दिले नांदा कौन तुजे समजाये,
वो करे जुल्मो सितम और तु हसता हि जाये.
क्यु करता हे कीसी बेवफा से मुह्ब्बत,
क्यु उसकी यादो मे रोज जलता ही जाये.
रोज रोता ह उसके गम मे इतना ज्यादा,
क देख के तेरा गम पत्थर भि पीधल जाये.
कितना अजीब हे” आकाश ” ये रोना भि तेरा,
की भीतर जांख के आंसु तेरे कोइ देख भि ना पाये.
नही की कभि उसने कद्र तेरे प्यार की,
और तु उस पर जान लुटाता ही जाये.
क्यो बनाई कुदरत ने चिज ऐसी चीज मुह्ब्बत,
कि ” नाँदा दिल ” दर्द सेह्ता ही जाये ओर तडपता ही जाये.
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